Monday, 26 October 2015

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केन नदी के बजाए दुर्गा प्रतिमाओं को नव-निर्मित तालाब में किया गया विसर्जित 


केन नदी के बजाए देवी मूर्तियाँ तथा ताजिये किए गए ससम्मान विसर्जित नव-निर्मित तालाब में 

बाँदा - बुंदेलखंड में भी उच्च न्यायलय के आदेश का असर देखने को मिला.हाई कोर्ट इलाहाबाद ने गंगा -यमुना में मूर्ति विअर्जन को रोक लगा रखी है.जिसको प्रभावी रूप में लागू करने की कवायद में चित्रकूट जनपद में गत वर्ष ही पीओपी की मूर्तियों का विसर्जन मंदाकनी में रोक दिया गया था.जिलाधिकारी नीलम अहलावत ने ये काम बखूबी किया था.

बुंदेलखंड के चित्रकूट मंडल मुख्यालय में उच्च न्याययालय के आदेश आने के पूर्व ही ज़िला फतेहपुर में गंगा को सहेजने की अगुआई का समर्थन करते हुए वर्ष 2010 से ये काम हो रहा था लेकिन इसका व्यापक असर 2012 में तब हुआ जब यहाँ केन नदी में प्रथम बार स्थानीय जल प्रहरियों ' भूमि विसर्जन ' या अस्थाई तालाब में प्लास्टर आफ पेरिस की मूर्ति विसर्जित करने का अभियान चलाया था.शहर में ग्यारह मूर्तियाँ भूमि विसर्जित हुई जिसका कुछ सांप्रदायिक ताकतों और इस पर्व की आड़ में अपनी सियासी गोट बिछाने वालों ने विरिध किया.

केन नदी के बजाए ताजियों को ससम्मान दफ़न किया गया नव-निर्मित तालाब में 


स्थानीय संस्था प्रवास सोसाइटी उच्च न्याययालय इस बात के लिए गई कि केन नदी भी चिल्ला घाट में यमुना में और मंदाकनी नदी राजापुर ( पहाड़ी ) में यमुना नदी में मिलती है जिस कारण मूर्तियाँ बहकर यमुना में ही जाएगी.कोर्ट की सख्ती के बाद इस साल चित्रकूट की तीन सैकड़ा और बाँदा की कुल 250 मूर्तियाँ केन नदी किनारे अस्थाई तालाब में विसर्जित की गई है.



अस्थाई तालाब को अगले दिवस नगर पालिका ने साफ कराया जिससे ताजिये भी ठन्डे हो सके. गौरतलब है की मुस्लिम भाई भी इस प्रकृति सम्यक कार्य में आगे आये उन्होंने अपने ताजियें भी ऐसे ही तालाब में प्रवाहित किये है.सभी दुर्गा पंडालों को इस पहल के लिए दिल्ली की संस्था अरण्या के सौन्जय से  ' आस्था एवं पर्यावरण मित्र सम्मान ' देकर उत्साह बढ़ाया गया है.इस कार्य में संजय कश्यप,बिपिन  त्यागी,विजयपाल बघेल ने सहयोग किया.केन नदी इस साल मूर्ति विसर्जन के बाद होने वाले प्रदूषण से बच पाई है .जल संकट से जूझ रहे इलाके में ये कार्य प्रेरणास्पद है.बाँदा के ग्राम महोखर के साथी योगेन्द्र सिंह 'योगी ',ब्रजेश सिंह ,शहर और सभी ग्रामीण क्षेत्रो  के दुर्गा पंडालों ने साझी सहभागिता की....

- आशीष सागर,बाँदा (सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण प्रेमी)
ashish.sagar@bundelkhand.in

Wednesday, 13 May 2015

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दुधवा लाइव पत्रिका को मिला अंतर्राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन नंबर आई एस एस एन

Dudhwa Live - An International Magazine of Environment and Agriculture

ISSN 2395-5791


दुधवा लाइव पत्रिका को अंतर्राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन संख्या आई एस एस एन प्रदत्त हुई है और इसी के साथ अब यह पत्रिका वैज्ञानिक जर्नल्स के तौर पर दुनिया भर से हिन्दी व् अंग्रेजी भाषा में शोध पत्र प्रकाशित कर सकेगी. अन्तराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आई एस ओ द्वारा विश्व भर के पत्र पत्रिकाओं के सरंक्षण व् उनकी पहचान को निर्धारित करने के लिए यूनेस्कों, (पेरिस फ्रांस) में यह संस्थान स्थापित किया गया, साथ ही दुनिया भर के देशों में सरकारी संस्थानों को इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड सीरियल नंबर प्रदान करने की व्यवस्था की गयी ताकि वह मानक के अनुरूप सफल पत्र-पत्रिकाओं को यह अंक प्रदान कर सके.

पांच वर्ष पूर्व २६ जनवरी २०१० को शुरू की गयी दुधवा लाइव पत्रिका जो वन्य जीवन, पर्यावरण व् कृषि से जुड़े मुद्दों पर आधारित है को यह संख्या भारत सरकार के कौंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च संस्थान द्वारा निर्गत की गयी, अब दुधवा लाइव के सभी अंकों को दुनिया भर के देशों के पुस्तकालयों में सूचीबद्ध किया जा सकेगा और उनका क्रमिक अवलोकन भी. पत्रिका अब अपने प्रकाशित अंकों पर आई एस एस एन बारकोड अंकित कर सकेगी
दुधवा लाइव के सभी पाठकों और लेखकों को बधाई.
ISSN 2395-5791
ISSN Barcode 9772395579003


कृष्ण कुमार मिश्र
संस्थापक सम्पादक
दुधवा लाइव
http://www.dudhwalive.com

Wednesday, 17 December 2014

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एशिया पेसिफिक देशों से आये लोगों ने पसंद किया तराई के जंगलों की इस झाकीं को. 

मंथन पुरस्कार २०१४ में नामित हुई दुधवा लाइव 

ई उत्तरा पुरस्कार २०१४ में प्रथम श्रेणी में रहा दुधवा लाइव प्रोजेक्ट 

नई दिल्ली: ४ दिसम्बर- डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन द्वारा आयोजित मंथन पुरस्कार २०१४ व् समिट आफ डिजिटल डेवेलपमेंट के आयोजन स्थल इंडिया हैविटेट सेंटर में दुधवा लाइव द्वारा लगाए गए स्टाल में हिमालयन तराई के साल फारेस्ट की जैव विविधता को फोटोग्राफी, बैनर, वन्य जीवन के सरंक्षण से सम्बंधित कहानियों को दर्शाया गया साथ ही  से भी पावर पॉइंट प्रजेंटेशन व्  स्लाइड शो के जरिये प्रकृति के अद्बुत व् रोमांचित कर देने वाले विषयों पर जानकारी दी गयी. 




इस समिट में प्रमुख सम्बोधन श्रीलंका के शिक्षा मंत्री श्री बंदुला गुणवर्धने, डिजिटल एम्पावरमेंट संस्था के प्रमुख ओसामा मंजर के रहे. समिट के सरंक्षकों में सैम पित्रोदा, आई आई एम के प्रो. अनिलगुप्ता आदि थे.

बांग्ला देश, श्रीलंका व् पाकिस्तान के तमाम प्रतिनिधियों ने अपने इन्नोवेशंस के साथ सक्रीय साझेदारी की.

  दुधवा लाइव डिजिटल मैगजीन व् वेब रेडियो के संस्थापक कृष्ण कुमार मिश्र को मंथन पुरस्कार २०१३ में नामित किया गया जिसके तहत उन्होंने इंडिया हैविटेट सेंटर में दुधवा लाइव की प्रदर्शनी का आयोजन किया। दुधवा लाइव टीम के प्रमुख सहयोगियों में सुशांत झा (पत्रकार एवं लेखक-अनुवादक), हिमांशु तिवारी (पर्यावरण प्रेमी), सतपाल सिंह (वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर), मंगेश त्रिवेदी (पर्यावरण प्रेमी व् योगाचार्य) ने अहम भूमिका निभाई।


रेडियो दुधवा लाइव डेस्क 







Saturday, 1 November 2014

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eUttara The Manthan Awards Book 2014

Dudhwa Live eMagazine  won an  award for raising environmental awareness from The Government of Uttar Pradesh and Digital Empowerment Foundation of India.





eUttara The Manthan Awards 2014: Minutes of the event



*Radio DudhwaLive Desk

Sunday, 28 September 2014

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इंटरनेट रडियो के साथ साथ उत्तर प्रदेश में पहली बार मोबाइल रडियो की शुरूवात की है रेडियो दुधवा लाइव ने,
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बोलती कहानी: वो पुलिया वाली बरगदिया 


अब सुनिए उस " वो पुलिया वाली बरगदिया" की कहानी अर्चना चावजी की ज़ुबानी...


जी हाँ कृष्ण कुमार मिश्र का यह संस्मरण जिसे अर्चना चावजी ने अपनी आवाज दी है









रेडियो दुधवा लाइव डेस्क 
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रेडियो दुधवा लाइव डेस्क 

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Krishna Kumar Mishra Founder Radio DudhwaLive.com email: editor.dhwalive@gmail.com

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